reported by Dr. SHIV DAS / डॉ. शिव दास
“व्यवस्था जवन देले बायन, सही बा। इहै लाइन लगल बा जवन हमहन क, मीटर वाला, वो
समय जब मुख्यमंत्री आवत रहलन त फिरी में लगल, आज के बाद सब पैसा मांगत बायन। लाइन
बिजली काट देत बाटन। चरचर-पचपच दिन हो गयल लाइन कटले। मीटर में लाइन बा, घरे में
बल्लब बरतै नहनी। हम लोग बिल नहीं भर पाएंगे। अगर सरकार के मंजूर हो तो अपना लाइन
कबार के ले जाए या हम लोग क लाइन फिरी करे। हम लोग कहां से बिल दे पाएंगे? ना हम लोगों के पास नौकरी बा। हम लोग गरीब अदमी, खुदै मजदूर अदमी। कहां से हम
लोग इकट्ठै लिया के पइसा देंगे उनको?”





























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