हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर काशी पत्रकार संघ ने "डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता की चुनौतियाँ और संभावनाएँ (सोशल मीडिया, फेक न्यूज डिजिटल प्लेटफॉर्म और बदलती पाठक संस्कृति) विषयक संगोष्ठी का किया आयोजन।
वनांचल एक्सप्रेस ब्यूरो
वाराणसी। प्रिंट मीडिया डिजिटल मीडिया के मुकाबले पिछड़ रहा है लेकिन प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता डिजिटल मीडिया से ज्यादा है। डिजिटल मीडिया में फेक न्यूज बड़े पैमाने पर देखने को मिलता है। बाजार ने पत्रकारिता को गिरफ्त में ले लिया है। व्यक्ति की संवेदना खत्म हो रही है जो पत्रकारिता के लिए ठीक नहीं है। पत्रकारिता के लिए पत्रकारों के अंदर संवेदना का होना बहुत ही जरूरी है। संवेदना के बिना पत्रकारिता नहीं हो सकती।
ये बातें महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और साहित्यकार प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को पराड़कर स्मृति सभागार में कहीं। वह हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर काशी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित "डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता की चुनौतियाँ और संभावनाएँ (सोशल मीडिया, फेक न्यूज डिजिटल प्लेटफॉर्म और बदलती पाठक संस्कृति) विषयक संगोष्ठी" में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। मीडिया में उद्योग घरानों (कॉर्पोरेट) के प्रवेश पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में समाजवाद और पूंजीवाद का संघर्ष होगा। समाजवाद ही हिन्दुस्तान का विकल्प बनेगा। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता में अंग्रेज़ी के इस्तेमाल पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अंग्रेजी एक दिन हिन्दी पत्रकारिता को खत्म कर देगी।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ इंदीवर ने कहा कि डिजिटल युग पत्रकारिता की नवीनता का युग है। इस युग में पत्रकारिता बाजार है। साहित्य भी बाजार है। इससे इन दोनों की चुनौतियां बढ़ी हैं। पत्रकारिता की चुनौतियां फेक न्यूज़ हैं जिस पर नियंत्रण बहुत ही आवश्यक है। हिन्दी पत्रकारिता का विस्तार अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है और वह वैश्विक स्तर पर करोड़ों पाठकों तक पहुँच रही है। लेकिन, इस तकनीकी विकास के साथ अनेक चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चुनौती फेक न्यूज़ और भ्रामक सूचनाओं की है। सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के खबरें तेजी से प्रसारित हो जाती हैं, जिससे समाज में भ्रम, तनाव और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे मीडिया को बचने की जरूरत है।
प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि पत्रकारिता कभी एक मिशन हुआ करती थी, जिसका उद्देश्य समाज में जागरूकता, न्याय और जनहित को बढ़ावा देना था। अब पत्रकारिता को संचालित करने के लिए धन और सत्ता नियामक हो जाती हैं जो चिंताजनक है। साहित्य पर भी इसका संकट आया है। अखबार पहले पत्रकारिता के मूल मंतव्य को प्रकाशित करता था लेकिन अब प्रायोजित हो गया है। डिजिटल युग अच्छा है लेकिन इसके माध्यमों का अंनियंत्रित इस्तेमाल चिंताजनक है।
"सोच-विचार" पत्रिका के संपादक वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि बदलती पाठक संस्कृति भी पत्रकारिता के लिए नई चुनौतियाँ और अवसर लेकर आई है। आज का पाठक त्वरित, संक्षिप्त और तथ्यपरक सामग्री चाहता है। ऐसे में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ विषय की गहराई और विश्वसनीयता पर भी ध्यान देना होगा। मीडिया को आत्ममुग्धता से बाहर निकलकर समाज के प्रति अपनी जवाबदेही को समझना होगा।
काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अत्रि भारद्वाज ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता बाजार की गिरफ्त में है। मिशन से प्रोफेशन की ओर बढ़ने से पत्रकारिता के मिशन में गिरावट आई है। डिजिटल युग बदलाव का प्रतीक है लेकिन बदलाव में सकारात्मकता होनी चाहिए। पत्रकारिता के लिए पत्रकारों में संवेदना का होना जरूरी है।
खोजी पत्रकार डॉ. शिव दास ने कहा कि डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता का विस्तार हुआ है। पत्रकारिता में कॉर्पोरेट मीडिया घरानों का एकाधिकार कायम नहीं हो पा रहा है। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उनके इस एकाधिकार चुनौती दे रहे हैं। हालांकि डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज पत्रकारिता के लिए एक चुनौती बनकर उभर रहा है जिन पर नियंत्रण बहुत ही जरूरी है।
वरिष्ठ पत्रकार अजय राय ने कहा कि समाज सुनने और सोचने की जिम्मेदारी से मुक्त हो चुका है। इस समय हर व्यक्ति पत्रकार है। हर व्यक्ति संपादक है। हम अपना संपादक, पत्रकार और समस्या नहीं खोज पा रहे हैं जो चिंताजनक है।
संगोष्ठी के अध्यक्षीय उद्बोधन में काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली चेतना है। वर्तमान समय डिजिटल क्रांति का युग है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म ने संचार और पत्रकारिता के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। हिन्दी पत्रकारिता भी इस परिवर्तन से अछूती नहीं रही।
संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु उपाध्याय ने किया। वहीं संघ के कोषाध्यक्ष डॉ. जयप्रकाश श्रीवास्तव ने अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर संघ के महामंत्री जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, साहित्यकार वेनी माधव मिश्र, जिला पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार, शिव कुमार पराग, शैलेन्द्र कुमार, मासूम, पूर्व अध्यक्ष बी बी यादव, पूर्व महामंत्री अखिलेश मिश्र, उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, प्रेस क्लब के अध्यक्ष चंदन रुपानी, उपाध्यक्ष देवकुमार केशरी, कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार कैलाश यादव, संजय मिश्र, कृष्ण बहादुर रावत, ओंकार तिवारी, रोहित चतुर्वेदी, पंकज त्रिपाठी, सुशील कुमार मिश्र, राजेन्द्र यादव, राजेश सेठ, शैलेन्द्र भारती, अरुण मालवीय, अमित शर्मा, राजेश यादव, निरुपमा श्रीवास्तव, विजय शंकर गुप्ता, रौशन जायसवाल, हरिबाबू श्रीवास्तव, दिलीप कुमार, एमडी जावेद, मुन्ना लाल साहनी, आशुतोष पाण्डेय आदि मौजूद थे।
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