गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

ग्राउंड रिपोर्टः मीटर में लाइन बा, घरे में बल्लब बरतै नहनी

reported by
Dr. SHIV DAS / डॉ. शिव दास

व्यवस्था जवन देले बायन, सही बा। इहै लाइन लगल बा जवन हमहन क, मीटर वाला, वो समय जब मुख्यमंत्री आवत रहलन त फिरी में लगल, आज के बाद सब पैसा मांगत बायन। लाइन बिजली काट देत बाटन। चरचर-पचपच दिन हो गयल लाइन कटले। मीटर में लाइन बा, घरे में बल्लब बरतै नहनी। हम लोग बिल नहीं भर पाएंगे। अगर सरकार के मंजूर हो तो अपना लाइन कबार के ले जाए या हम लोग क लाइन फिरी करे। हम लोग कहां से बिल दे पाएंगे? ना हम लोगों के पास नौकरी बा। हम लोग गरीब अदमी, खुदै मजदूर अदमी। कहां से हम लोग इकट्ठै लिया के पइसा देंगे उनको?”

ये कहना है मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के पहले लाभार्थी महेंद्र का। महेंद्र सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज विकास खण्ड के ग्राम पंचायत तिनताली स्थित मुसहर बस्ती के निवासी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब साढ़े सात साल पहले 12 सितम्बर 2018 को इस बस्ती का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने आवास निर्माण के लिए महेंद्र की भूमि का पूजन कर मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की शुरुआत की थी। 

मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मिले आवास के सामने महेंद्र

उत्तर प्रदेश सरकार की विभागीय वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में तिनताली गांव की मुसहर बस्ती के कुल 22 व्यक्तियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।
फाइल फोटोः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तिनताली मुसहर बस्ती का निरीक्षण करते हुए

महेंद्र और उनकी बस्ती के लोगों का जीवन-यापन पूरी तरह से गांव में मिलने वाली मजदूरी पर निर्भर है। इन दिनों गांव में काम नहीं है। इसलिए वे वैकल्पिक मजदूरी की राह पर हैं। गत 21 मार्च की सुबह महेंद्र और उनकी बस्ती के लोग नरई घास की फली को इकट्ठा करने करीब 20 किलोमीटर दूर कंडाकोट पहाड़ी जा रहे थे। पूछने पर महेंद्र बताते हैं, पांच दिन बाद अब आवल जाई। पांच दिन ओइजैं रहके बनावल-खायल जाई। जब नरई इकट्ठा हो जाई, त वापस आवल जाई।”  

महेंद्र के आवास के पास जमा की गई नरई घास की फली

महेंद्र और उनकी बस्ती के लोग नरई की फली को सूखाकर उसका बीच निकालते हैं और उसे व्यापारियों को बेच देते हैं। इससे उनको प्रति व्यक्ति औसतन 200-300 रुपये प्रतिदिन की आमदनी हो जाती है।

तिनताली स्थित नई मुसहर बस्ती

बिजली की समस्या के बारे में पूछने पर महेंद्र बताते हैं, परधान जी से कहले रहली, त उ बिजली बिभाग के जेई से बात कइलन लेकिन अबहीं तक बल्लब नाहीं बरत बा।


जब महेंद्र से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के बारे में पूछा गया तो वह कहते हैं, हम बोली नहीं पाए, न वो बोल पाए। अधिकारी सब आए, हम सबको आवास क अत्थू दिये, स्मृति पत्र। वही देकर चले गए। उधर दो-तीन ठे मकान का निरीक्षण किये। उसके बाद कोई हाल-चाल नहीं। आउर जनता, हमारे घर क, गांव क, कुल सब घरे में बंद थे।"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, घोरावल विधायक अनिल मौर्य और महेंद्र (फाइल फोटो)

जब महेंद्र से पूछा कि किन लोगों ने बस्ती के लोगों को घरों में बंद किया था तो उन्होंने इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। महेंद्र से जब मुख्यमंत्री के मिलने की जानकारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुख्यमंत्री के स्थलीय निरीक्षण और भूमि पूजन कार्यक्रम की प्रशासनिक स्क्रिप्ट को यूं बयां किया, अरे अधिकारी सब रहनै, सब कहनै कि यहां आएंगे मुख्यमंत्री, दु-चार दिन पहिले से यहां कुल साफ-सुथरा, कुल जसन मनाने लगे यहां आके, हमारा नींव खुदवाये उसी समय आके।"

मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत महेंद्र का निर्मित आवास
फिलहाल महेंद्र का आवास बन चुका है और वे लोग इसमें रह रहे हैं। सरकार से मिली धनराशि में आवास की दीवारों और फर्श के प्लास्टर का काम नहीं हो पाया है। विद्युत विभाग ने मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बने आवासों पर अब अपना स्मार्ट मीटर लगा दिया जिससे इसके लाभान्वितों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।   

तिनताली मुसहर बस्ती निवासी महेंद्र 

महेंद्र के मकान के ठीक पीछे प्रधानमंत्री आवाज योजना (ग्रामीण) के लाभार्थी धनराज का आवास दिखाई दिया जो उन्हें वित्तीय वर्ष 2016-17 में आबंटित हुआ था। मौके पर धनराज की पत्नी सुदामी मिलीं। वह मिट्टी के चुल्हे पर पोहा पका रही थीं। 

मिट्टी के चुल्हे पर खाना बना रही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की लाभार्थी सुदामी

तिनताली मुसहर बस्ती के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुदामी से मिले थे और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उन्हें एलपीजी गैस का कनेक्शन वितरित किए थे। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सुदामी को गैस कनेक्शन देते हुए

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाबत सुदामी बताती हैं कि मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत एलपीजी गैस का कनेक्शन वितरित किया था लेकिन उनकी अनुपस्थिति में कोई उनका सिलेंडर चोरी कर लिया। अब वह मिट्टी के चुल्हे पर खाना बनाती हैं।

सुदामी के घर के पास बस्ती के बच्चे

सुदामी भाजपा की केंद्र वाली मोदी सरकार की दिव्यांग हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान उन्हें तीन पहिया वाली साइकिल मिली थी जो अब टूट चुकी है और उनके किसी काम की नहीं है।दिव्यांग पेंशन से लाभांवित सुदामी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बस्ती के दौरे के दौरान उनकी समस्या के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा और ना ही वह कुछ कह पाई थीं। सुदामी ने बताया कि मुख्यमंत्री गैस कनेक्शन देकर और फोटो खिंचवा कर चले गए थे।

ग्राम प्रधान द्वारा मुसहर बस्ती में लगवाई गई पानी की टंकी

तिनताली ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान संतोष कुमार वर्मा बताते हैं कि अन्य सात लोग भी मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभान्वित हुए हैं जिनमें एक मुसहर समुदाय का व्यक्ति भी शामिल है। अन्य लाभान्वित लोगों में पांच विकलांग और एक विधवा हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुसहर बस्ती में बृजेश कुमार, दल्लू, धर्मावती और भोला को आवास की जरूरत है। उनका नाम मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए भेजा गया है। उन्हें आवास आबंटित होने के बाद मुसहर बस्ती में सभी परिवारों के पास अपना खुद का पक्का मकान हो जाएगा।

ग्राम पंचायत तिनताली का पंचायत भवन

मुसहर बस्ती में आबाद मकानों के सामने जल जीवन मिशन के तहत लगे नल भी दिखाई दिए लेकिन इन नलों में पानी नहीं आ रहा था। इसके बारे में पूछने पर पुष्पा बताती हैं, नल में पानी नाही आवला। एके लगले ढेर दिन हो गइल... साल भर। हालांकि ग्राम प्रधान की ओर से प्लास्टिक की टंकी में पीने के पानी की व्यवस्था जरूर की गई है। 

तिनताली मुसहर बस्ती में जन जीवन मिशन के तहत लगे नल

 वाराणसी-शक्तिनगर राज्यमार्ग (एसएच-4ए) के पश्चिमी किनारे बहुअरा ग्राम सचिवालय से महज 10 मीटर दूरी पर स्थित तिनताली मुसहर बस्ती दो भागों विभाजित है जिसे पुरानी मुसहर बस्ती और नई मुसहर बस्ती कहा जा सकता है।

महेन्द्र का आवास नई मुसहर बस्ती में है जो मुसहर आबादी वाली भूमि पर आबाद बताई जा रही है। पड़ताल में सामने आया कि ग्राम-सभा के राजस्व रिकॉर्ड में करीब 13 बिस्वा (0.1610 हेक्टेयर) मुसहर आबादी दर्ज है। 

नई मुसहर बस्ती ग्राम-सभा की करीब 15 बिस्वा भूमि पर बसी है जिसमें करीब दो बिस्वा (0.0250 हेक्टेयर) कुम्हारों के लिए मिट्टी निकालने वाली भूमि भी शामिल है। जिला प्रशासन आज तक कुम्हारों को उक्त भूमि मिट्टी निकालने के लिए मुहैया नहीं करा पाया है।

नई मुसहर बस्ती वाली बसावटों की पड़ताल में सामने आया कि मुसहर समुदाय के लिए सुरक्षित ग्रामसभा की करीब दो बिस्वा भूमि पर अन्य पिछड़ा वर्ग के सुरेश मौर्या का मकान है। यह मुसहर बस्ती का सबसे बड़ा और समृद्ध बसावट है जिसमें जनरल स्टोर की दुकान भी है। आबादी के संदर्भ में राजस्व प्रावधानों और क्षेत्रीय लेखपाल के दावों पर गौर करें तो सुरेश मौर्या का मकान पुरी तरह से गैर-कानूनी है जो अतिक्रमण की श्रेणी में आएगा। मुसहर बस्ती निवासी धनराज ने बताया कि वे लोग इसे लेकर कई बार जिला प्रशासन से लिखित शिकायत कर चुके हैं। तहसील दिवस में भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

तिनताली मुसहर बस्ती का निरीक्षण करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

बता दें कि तिनताली मुसहर बस्ती सोनभद्र जिला मुख्यालय से महज 17 किलोमीटर दूर है। वर्ष 2015 से पहले यह रॉबर्ट्सगंज विकास खंड के ग्राम पंचायत बहुअरा का हिस्सा हुआ करता था। हालांकि उस समय भी तिनताली राजस्व गांव के रूप में अपनी भौतिक पहचान रखता था और इसकी सीमाएं सुनिश्चित थीं। तीन तरफ से इसकी सीमाओं की घेराबंदी किये हुए नाले इसे छोटे से गांव में समेटे हुए हैं जिसका क्षेत्रफल 201.65 हेक्टेयर है।

तिनताली मुसहर बस्ती की बसावट की शुरुआत आज से करीब छह दशक पहले हुई थी। लोग बताते हैं कि बिहार के मोहनिया इलाके के रघुवीरगढ़ निवासी सुक्खू और तत्कालीन मिर्जापुर (अब चंदौली) जिले के शीशाताली (शिकारगंज) निवासी हरिदास वनवासी गांव के किसानों के हरवाह (खेतिहर मजदूर) के रूप में पहली बार तिनताली आए थे। बाद में मुसहर जाति के अन्य छह लोग मराछू, मुराहू, सरजू, नारायण, बाबूलाल और बलदेव भी काम की तलाश में यहां आ गए। कुछ महीनों बाद वे परिवार के साथ गांव में रहने लगे। बहुअरा ग्राम पंचायत की संस्तुति पर प्रशासन ने उक्त आठ लोगों के नाम से बहुअरा(बंगला) के पास से गुजरने वाले नाले के किनारे ग्राम सभा की भूमि पट्टा कर दी जो आज तिनताली मुसहर बस्ती के नाम से जानी जाती है। बस्ती के लोग बताते हैं कि इंदिरा जी के शासनकाल में हम आठ लोगों को पट्टा हुआ था। भूमि पट्टा होने के बाद वे लोग पट्टेवाली जमीन पर अपनी-अपनी छोपड़ी तान ली और परिवार के साथ रहने लगे।

उक्त आठ लोगों का कुनबा आज करीब सवा सौ की आबादी में तब्दील हो चुका है। उनके परिवार के सदस्यों और उनके रिश्तेदारों ने करीब डेढ़ दशक पहले पास में ग्राम-सभा की बंजर जमीन पर कब्जा कर लिया और झोपड़ी बनाकर रहने लगे। चकबंदी के दौरान प्रशासन ने इसे मुसहर आबादी के नाम से सुरक्षित कर दिया जो करीब 13 बिस्वा भूमि पर आबाद है।

जिला आपूर्ति एवं खाद्य रसद विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तिनताली मुसहर बस्ती में कुल 32 राशन कार्ड आबंटित हैं। इनमें छह परिवार अंत्योदय राशन कार्ड धारक हैं। अंत्योदय राशन कार्ड धारकों में बिफनी पत्नी सीताराम, हीरावती पत्नी मराछू, मदेश्वरी पत्नी नारायण, सुदामिनी पत्नी उमा शंकर, चंद्रावती पत्नी राम उग्रह और बासमती पत्नी विजयी का नाम शामिल है। रमाकांत, बृजेश, सुखलाल, चंदरभान, मुखलाल आदि का कहना है कि परिवार में चार से पांच सदस्य हो चुके हैं जिससे राशन की खपत ज्यादा है। जो राशन कार्ड मिला है, उसपर मिलने वाला राशन पर्याप्त नहीं है।

शिक्षा के मामले में इस बस्ती की अपनी ही एक अलग कहानी है। सवा सौ आबादी वाली इस बस्ती में कोई भी पुरुष या महिला इंटर मीडिएट पास नहीं है। तिनताली मुसहर बस्ती के इतिहास में पहली बार ग्राम पंचायत सदस्य लालमनी का लड़का राजेश इंटर मीडिएट की पढ़ाई की थी जिसकी मृत्यु हो चुकी है। हालांकि बस्ती में हाई स्कूल पास एक शख्स और भी हैं जिनका नाम राम उग्रह है। राम उग्रह हरिदास वनवासी के लड़के हैं। उन्हें याद नहीं है कि उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा कब पास की थी लेकिन उन्होंने होम गार्ड की नौकरी के लिए पूरी कोशिश की थी। हालांकि वे इसमें सफल नहीं हो पाए। इसके लिए वे पुलिस विभाग के अधिकारियों पर जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाते हैं।

बस्ती के बच्चों में स्कूल छोड़ने की समस्या बहुत ज्यादा है। आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय में बच्चों का पंजीकरण हो जाता है लेकिन पूर्व माध्यमिक स्तर की शिक्षा वे हासिल नहीं कर पाते हैं। ऐसा नहीं है कि बस्ती के आस-पास कोई विद्यालय नहीं है। बस्ती से महज 100 मीटर की दूरी पर सरकार की ओर संचालित प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्थित है लेकिन उनके आर्थिक हालात उन्हें उनका लाभ लेने से वंचित कर देते हैं। इसके अलावा बस्तीवालों में पढ़ाई के प्रति जागरूकरता का अभाव भी है जो उन्हें उच्च स्तर तक शिक्षित होने से रोकता है।

सरकार की ओर से संचालित विद्यालयों के अलावा बस्ती से आधा किलोमीटर की परिधि में करीब आधा दर्जन निजी शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं लेकिन उनके एजेंडा में इन बस्तीवालों को शिक्षित करने का मुद्दा शामिल नहीं है जबकि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का दाखिल देना उनके लिए अनिवार्य है। हालांकि सरकारी सहायता हासिल करने के लिए वे नर्सरी से लेकर इंटर मीडिएट तक गरीबों को शिक्षित करने का दावा करते हैं।

ग्राम पंचायत तिनताली में मुसहर बस्ती से करीब दो किलोमीटर दूर एक प्राथमिक विद्यालय जरूर है और वहीं आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन भी किया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्र के आस-पास ब्राह्णण, कोइरी और अहीर समुदाय के लोगों का आवास है जिनके बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र पर बहुत ही कम संख्या में जाते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र पर अधिकतर बच्चे मुसहर बस्ती के उपस्थित रहते हैं। इसके बावजूद ग्राम-पंचायत तिनताली आंगनबाड़ी केंद्र मुसहर बस्ती से दो किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय के परिसर में है। मुसहर बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बनवाने पर ग्राम-पंचायत के सदस्य बृजेश सोनी बताते हैं कि वहां भूमि उपलब्ध नहीं होने की वजह से प्राथमिक विद्यालय परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण गया।

जनगणना-2011 के आंकड़ों पर गौर करें तो 157 परिवारों वाले तिनताली गांव की कुल आबादी 1207 है। इनमें 110 लोग अनुसूचित जाति वर्ग के हैं। अनुसूचित जातियों में सबसे ज्यादा आबादी मुसहर बस्ती निवासी मुसहर समुदाय की है जो मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं। हालांकि दो-तीन परिवार अन्य अनुसूचित जाति के भी हैं। कोइरी-कुशवाहा बहुल इस गांव में ब्राह्मण, अहीर, गड़ेरी, कुर्मी, कहार, कुम्हार, सोनार और मुसलमान भी हैं जो खेतिहर सीमांत किसान हैं।

अगर उत्तर प्रदेश सरकार के जल जीवन मिशन की अधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों पर गौर करें तो तिनताली ग्राम पंचायत में कुल 157 घर हैं जिनमें 1290 लोग निवास करते हैं। इनमें 117 लोग अनुसूचित जाति वर्ग से हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश का मुसहर समाज अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल है। यह समाज सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा है। इस समाज की दयनीय हालत की वजह से इनका मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठ चुका है। वाराणसी स्थित मानवाधिकार जन निगरानी समिति (PVCHR) के तत्कालीन सदस्य अनूप श्रीवास्तव ने 23 सितंबर 2013 को वाराणसी जिले के नेहिया गांव स्थित मुसहर बस्ती में दो साल से खराब पड़े हैंडपंप, आवास, राशन कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र आदि से संबंधित शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी।

मानवाधिकार जननिगरानी समिति का शिकायती पत्र

आयोग ने 27 नवंबर 2013 को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था, संपूर्ण उत्तर प्रदेश में रह रहे मुसहर समुदाय का विशेष सर्वे किया जाए। साथ ही उनकी योग्यता के आधार पर उनका नाम बीपीएल सूची, अन्त्योदय सूची और अन्य दूसरी सूचियों में सुनिश्चित रूप से शामिल किया जाए।

इस संदर्भ में आयोग ने राज्य सरकार से 31 मार्च 2014 तक रपट मांगी लेकिन तत्कालीन उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया। हालांकि वाराणसी के जिला प्रशासन ने नेहिया गांव की मुसहर बस्ती की अधिकतर समस्याओं का समाधान कर दिया था। इसके बावजूद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं था।  

वर्ष 2017 में भाजपा की अगुआई वाली योगी सरकार सत्ता में आ गई लेकिन मुसहर समुदाय के विकास के मामले में उसका रवैया भी उदासीन बना रहा। राज्य सरकार की कार्यशैली से नाराज राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 20 सितम्बर 2017 को मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को आदेशित करते हुए लिखा, अत्यंत गरीब श्रेणी में मुसहर समुदाय के परिवारों का नाम शामिल नहीं किया जाना और केंद्र एवं राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा एवं जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें इस तरह से मुहैया नहीं कराना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-20 के तहत सुनिश्चित सम्मान के साथ जीवन जीने के उनके अधिकार का उल्लंघन करने के समान है। इसलिए, यदि प्रस्तावित सर्वे और उसके आधार पर कार्रवाई में आगे देरी की जाती है तो आयोग मानवाधिकार सुरक्षा अधिनियम-1993 की धारा-13 के तहत कठोर कार्रवाई करेगा।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश का अंश

आयोग ने अपने आदेश में यह भी लिखा, ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग के निर्देशानुसार सर्वे नहीं किया गया है। इसलिए आयोग उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को उत्तर प्रदेश में रह रहे मुसहर समुदाय का सर्वे करने का निर्देश देता है। साथ ही आयोग यह भी निर्देश देता है कि मुख्य सचिव चार महीने के अंदर 27 अगस्त 2015 को आयोग की सुनवाई के दौरान निर्देशित बिंदुओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

आयोग के उक्त आदेश से डरे उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने 22 जनवरी 2018 को सूबे के समस्त मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर प्राथमिकता के आधार पर मुसहर समुदाय के परिवारों का सर्वेक्षण कर केंद्र और राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिये जाने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर एक कमेटी गठित की जो मुसहरों के लिए जरूरी योजनाओं का अनुमोदन करेगा।

मुख्य सचिव ने पत्र में लिखा, "प्रदेश के मुसहर जाति बाहुल्य जनपदों यथा- गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली, जौनपुर सहित अन्य समस्त जनपदों में निवासरत मुसहर जाति के परिवारों का सर्वे करके उन्हें पात्रता के आधार पर भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा संचालित आवासीय योजनाओं, उनके परिवारों को अंत्योदय सूची में शामिल करने/पात्र गृहस्थी कार्ड (राशन कार्ड) निर्गत करने, पेंशन का लाभ व महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अनुमन्य कराने, विद्युत कनेक्शन की सुविधा प्रदान करने, पेयजल हेतु हैंडपंप लगवाने एवं अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अनुमन्य कराये जाने हेतु जनपद स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाता है। समाज कल्याण अधिकारी समिति के सदस्य सचिव होंगे जबकि जिला विकास अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, अपर जिला अधिकारी (वित्त एवं राजस्व), ऊर्जा विभाग और जल निगम के अधिशासी अभियंता इसके बतौर सदस्य होंगे। उक्त समिति जनपदों में मुसहर जाति के परिवारों को सर्वे कर पात्रता के आधार पर एक माह के अंदर उपरोक्त अनुमन्य सुविधाओं का लाभ उपलब्ध करायेगी और तदानुसार अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को उपलब्ध करायेगी।" 

उत्तर प्रदेश में मुसहर समुदाय के विकास के संबंध में सूबे के मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश और उसके प्रभाव के बारे में मानवाधिकार जन निगरानी समिति (PVCHR) के संयोजक डॉ. लेनिन रघुवंशी कहते हैं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक निर्णायक निर्णय दिया था। सरकार ने उस आधार पर कार्य भी किया लेकिन जो समुदाय 2000 सालों से वंचना झेल रहे हैं, इनके साथ सतत काम किए बिना और दृढ़कालीन योजना बनाए बिना उनका किसी प्रकार से कल्याण नहीं किया जा सकता।

मानवाधिकार जननिगरानी समिति के संयोजक लेनिन रघुवंशी

वह आगे कहते हैं, मुसहर जाति के लोगों की परिस्थितियां अलग हैं, उनकी वंचना अलग है। उनके पास कोई स्थाई आजीविका नहीं है, रोजगार नहीं है, ठेका नहीं है, जमीन नहीं है। बंधुआ मजदूरी करते हैं। वे ईंट भट्ठे पर काम करते हैं, खेतों में काम करते हैं।आजीविका की खोज में पलायन करते रहते हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के शासनादेश और उसके बाद हुए बदलाव के बाबत सवाल करने पर डॉ. लेनिन कहते हैं, शासनादेश के बाद काफी चीजें बदली भी हैं लेकिन बहुत सी चीजें स्थाई भी नहीं हैं। जैसे बिजली का मीटर लग गया है। मीटर का बिल वह कहां से देंगे? जब आजीविका नहीं हैं। आजीविका नहीं होने से ऐसी चीजें स्थाई नहीं रह गई हैं। जैसे स्वास्थ्य के मामले में 20 प्रतिशत बस्तियों में बदलाव हुआ है लेकिन 80 प्रतिशत बस्तियों में लोग अभी भी समस्याएं झेल रहे हैं।

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