शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले के खिलाफ नौजवानों ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के आवास पर किया प्रदर्शन, लाठीचार्ज, कई घायल, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में 69000 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का मामला।

वनांचल एक्सप्रेस ब्यूरो

लखनऊ: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में 69000 शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी (आरक्षण घोटाला) के खिलाफ छात्रों और नौजवानों ने आज उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों और नौजवानों पर लाठीचार्ज किया जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर अन्य किसी स्थान पर ले गई। 
प्रदर्शन में शामिल इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य, प्रदेश सहसचिव व लखनऊ के संयोजक राजीव गुप्ता ने कहा कि सरकार दमन के बल पर नौजवानों की आवाज नहीं दबा सकती है।  आरक्षण संवैधानिक हक है और हम उसको लेकर रहेंगे। आरक्षण विरोधी सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने गिरफ्तार नौजवानों और छात्रों को तत्काल रिहा करने की मांग की। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश ने दिसंबर, 2019 में विज्ञापन प्रकाशित किया था। 6 जनवरी 2020 को इसकी लिखित परीक्षा हुई थी। इसमें करीब 409530 अभ्यर्थी शामिल हुए। 12 मई को इसका परिणाम जारी हुआ जिसमें 146060 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने ओवरलैपिंग का हवाला देकर परिणाम में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के बराबर अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनकी कैटगरी में रखकर उनके गृह जनपद में नियुक्ति देने की व्यवस्था लागू कर दी। इससे चयन प्रक्रिया से अन्य पिछड़ा वर्ग के करीब 15000 अभ्यर्थियों के बाहर होने की संभावना है। 

अगर कानूनी प्रावधानों की बात करें तो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (अनुसूचित जातियों,अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम-1994 की धारा-3(6) कहता है कि उपधारा-(1) में उल्लेखित किसी श्रेणी से संबंधित कोई व्यक्ति योग्यता के आधार पर खुली प्रतियोगिता में सामान्य अभ्यर्थियों के साथ चयनित होता है तो उसे उपधारा-(1) के अधीन ऐसी श्रेणी के लिए आरक्षित रिक्तियों के प्रति समायोजित नहीं किया जाएगा। कार्मिक अनुभाग-1 की ओर से 25 मार्च 1994 को जारी शासनादेश (संख्या-1/1/94-कार्मिक-1/1994) में भी इसका जिक्र किया गया है जो कहता है, "यदि आरक्षित श्रेणी से संबंधित कोई व्यक्ति योग्यता के आधार पर खुली प्रतियोगिता में सामान्य अभ्यर्थियों के साथ चयनित होता है तो उसे आरक्षित रिक्तियों के प्रति समायोजित नहीं किया जाएगा अर्थात् उसे अनारक्षित रिक्तियों के प्रति समायोजित किया जाएगा, भले ही उसने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनुमन्य किसी सुविधा या छूट (यथा आयु सीमा में छूट आदि) का उपभोग किया हो।"





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