COVID-19: अतिथि शिक्षक संघ ने केन्द्र और दिल्ली सरकार को लिखा पत्र, महामारी के शिकार अतिथि शिक्षकों के लिए मांगा मुआवजा
मेडिकल और पूरा चिकित्सीय खर्च वहन करने के साथ मृतक आश्रितों को हर मार 10,000 रुपये देने की भी मांग।
वनांचल एक्सप्रेस ब्यूरो
दिल्ली विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षकों के संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भेदभाव और शोषण का आरोप लगाया है। साथ ही उसने केंद्र और दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर कोरोना महामारी से ग्रसित अतिथि शिक्षकों के इलाज और मेडिकल का पूरा खर्च वहन करने के साथ इस बीमारी से मरे अतिथि शिक्षकों के परिजनों को हर माह 10000 रुपए देने की मांग की है।
दिल्ली विश्वविद्यालय अतिथि शिक्षक संघ की अध्यक्ष आरती रानी प्रजापति ने आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षकों को कई प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। संघ इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन और अन्य उच्च अधिकारियों से निरंतर करता रहा है लेकिन आज तक इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और ना ही उनकी जरूरी मांगों को पूरा किया गया। कोरोना महामारी में भी इन गेस्ट टीचर्स की कोई सुध लेने वाला नहीं है। इसे लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक संघ ने माननीय प्रधानमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने बीमारी की अवस्था में भी अपना कर्त्तव्य निभाया और निभा रहे हैं। इसकी वजह से शिक्षण कार्य अब भी निर्बाध गति से चल रहा है। कोरोना महामारी के कारण कुछ अतिथि शिक्षकों की समुचित इलाज के अभाव में मृत्यु हो गई है। कुछ अब भी अस्पतालों में बीमारी से जूझ रहे हैं। कुछ का परिवार इतना प्रभावित हुआ है कि उनकी सैलरी इस महामारी में पर्याप्त नहीं है। इनमें से अधिकतर वे हैं जिनके सहारे उनका पूरा परिवार चल रहा था।
उनका कहना है कि इस महामारी में सिर्फ वे खुद ही नहीं, बल्कि उनका परिवार और रिश्तेदार भी बीमार हैं। गेस्ट टीचर्स के हितों का ध्यान रखने वाली कोई संस्था अथवा संगठन भी नहीं है जिससे वे बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है।
अतिथि शिक्षकों की मांग है कि बीमार अतिथि शिक्षकों को वेतन सहित अवकाश देने का प्रावधान किया जाए, ताकि वे अपना समुचित इलाज करवा सकें। महामारी की विशेष परिस्थिति को देखते हुए उनके मेडिकल का खर्च और उनका पूरा चिकित्सीय खर्च भी सरकार वहन करें। इसके अतिरिक्त उनके आश्रितों को सरकार 10,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान करें।
आपको बताते चलें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नियमित काॅलेज के अतिरिक्त ड्यू के ही NCWEB और SOL जैसे संस्थानों में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों की एक बड़ी संख्या है। इन गेस्ट टीचर्स को प्रति क्लास के हिसाब से वेतन दिया जाता है और उसके लिए भी एक साल से अधिक समय का इंतजार करना पड़ता है। इसके कारण वे जरूरत के हिसाब से अपने पैसों का समय पर इस्तेमाल नहीं कर पाते। ये वेतन भी बहुत थोड़ा होता है जिससे गुजारा कर पाना मुश्किल है। कोरोना महामारी ने उनकी स्थिति और भी बदतर कर दी है।





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